वो आते तो हैं मेरे सामने से, मगर जाते नहीं हैं,
क्यूकी मुझे अपना दूसरा पहलू दिखाते नहीं हैं।
दुःख बहुत होता है, उनकी इस बात को सुनकर,
जब वो मुझसे कहते हैं कि हम तुमसे कुछ भी छुपाते नहीं हैं।
यही आलम हमारी जिन्दगी का होता है दोस्तों,
एक पहलू तो हम समझ लेते हैं, दूसरा समझ पाते नहीं हैं।
सह लेते हैं अपनों के दिए दर्द को हंसकर,
हम भी अपना दर्द किसी को जताते नहीं हैं।
लोग जालिम बहुत हैं इस ज़माने में दोस्तों,
दर्द तो देते हैं लेकिन कभी हंस्हते नहीं हैं।
दुनियाँ में बेवफाई इस कदर है "जगजीत",
कि लोग बेवफाई भी बफदारी से निभाते नहीं हैं।
क्यूकी मुझे अपना दूसरा पहलू दिखाते नहीं हैं।
दुःख बहुत होता है, उनकी इस बात को सुनकर,
जब वो मुझसे कहते हैं कि हम तुमसे कुछ भी छुपाते नहीं हैं।
यही आलम हमारी जिन्दगी का होता है दोस्तों,
एक पहलू तो हम समझ लेते हैं, दूसरा समझ पाते नहीं हैं।
सह लेते हैं अपनों के दिए दर्द को हंसकर,
हम भी अपना दर्द किसी को जताते नहीं हैं।
लोग जालिम बहुत हैं इस ज़माने में दोस्तों,
दर्द तो देते हैं लेकिन कभी हंस्हते नहीं हैं।
दुनियाँ में बेवफाई इस कदर है "जगजीत",
कि लोग बेवफाई भी बफदारी से निभाते नहीं हैं।
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