१. मेरे घर मैं अँधेरा है तो कोई बात नहीं.....
तेरे घर के उजाले से मेरे दिल में तो रौनक है…
२. आज प्यार की परिभाषा भूल गए हैं लोग,
गुरुर मे अपने प्यार की भाषा भूल गए हैं लोग….
छिछोरेपन को वो प्यार कहा करते हैं,
सच्चे प्यार की अभिलाषा भूल गए हैं लोग।
३. तपते सेहरा की कहानी पर भी लिख सकता है…
बहते दरिया की रवानी पर भी लिख सकता है….
दिल के जज्बात को कागज की जरुरत क्या है…
लिखने वाला तो कीबोर्ड से ही कहानी लिख सकता है…
४. जिन्दगी को ढूढने में जिन्दगी जाती रही,
इस तरेह घेर गमो ने हर ख़ुशी जाती रही।
उससे बिछुड़ कर हाल मेरा कुछ ऐसा हुआ,
श्याम के होंठो से जैसे बांसुरी जाती रही।
तेरे घर के उजाले से मेरे दिल में तो रौनक है…
२. आज प्यार की परिभाषा भूल गए हैं लोग,
गुरुर मे अपने प्यार की भाषा भूल गए हैं लोग….
छिछोरेपन को वो प्यार कहा करते हैं,
सच्चे प्यार की अभिलाषा भूल गए हैं लोग।
३. तपते सेहरा की कहानी पर भी लिख सकता है…
बहते दरिया की रवानी पर भी लिख सकता है….
दिल के जज्बात को कागज की जरुरत क्या है…
लिखने वाला तो कीबोर्ड से ही कहानी लिख सकता है…
४. जिन्दगी को ढूढने में जिन्दगी जाती रही,
इस तरेह घेर गमो ने हर ख़ुशी जाती रही।
उससे बिछुड़ कर हाल मेरा कुछ ऐसा हुआ,
श्याम के होंठो से जैसे बांसुरी जाती रही।
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